शाकाहार ही मानवता का मार्ग, मनेछा में पंकज महाराज ने दिया संदेश
खेतासराय, जौनपुर। 122 दिवसीय शाकाहार सदाचार जनजागरण यात्रा अपने 114वें पड़ाव पर गुरुवार की सायंकाल ग्राम मनेछा पहुँची जहाँ ग्रामवासियों तथा अरवल (बिहार) से आए श्रद्धालुओं ने बाजा–गाजा, फूल-मालाओं एवं दीप प्रज्वलित कलशों के साथ यात्रियों का भव्य स्वागत किया।
यात्रा के दौरान आयोजित सत्संग में संस्थाध्यक्ष संत पंकज महाराज ने मानव जीवन की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि मानव शरीर को महात्माओं ने सुर दुर्लभ बताया है। ऐसा शरीर जिसमें प्रभु का दिव्य अंश विद्यमान रहता है। संत-महात्माओं के कथनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भीतर की दिव्य ध्वनि और प्रकाश का अनुभव केवल पूर्ण सतगुरु की कृपा से ही संभव है।
महाराज ने सुमिरन, ध्यान और भजन की क्रिया को जीवन का वास्तविक मार्ग बताते हुए कहा कि यह साधना पूर्ण सत्य है जिसे अपनाने पर स्वयं अनुभव होने लगता है। गुरु-प्राप्ति से मनुष्य के जीवन में ऐसा बदलाव आता है जैसा वाल्मीकि से ब्रह्म समान होने तक वर्णित है।
महाराज ने शाकाहार को मानव शरीर का स्वाभाविक आहार बताते हुए कहा कि शरीर किसी कब्रिस्तान का स्थान नहीं जिसमें मृत पशु-पक्षियों का मांस डाला जाय। मृत देह को घर में रखने से लोग घबराते हैं। ऐसे में पेट में मृत शरीर डालना भी अनुचित है। उन्होंने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे स्वयं भी शाकाहार अपनाएँ और अपने बच्चों को भी इसी मार्ग पर प्रेरित करें। नशीले पदार्थों से दूरी बनाने की विशेष अपील भी किया। अरज़ी हमारी है, मर्ज़ी आपकी कहते हुए उन्होंने लोगों से संयमित, सदाचारपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया।
इस अवसर पर ऋषिदेव श्रीवास्तव, दलसिंगार, राकेश शर्मा, वीरेंद्र यादव, राणा प्रताप सिंह, लल्लन जी, मास्टर अशोक, श्रीपति, महेश प्रसाद केशरी, मोहित प्रजापति सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे। जनजागरण यात्रा अपना अगला पड़ाव ग्राम डिहिया, ब्लॉक खुटहन के लिए प्रस्थान कर गई।
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