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सरायख्वाजा का ऐतिहासिक भादो छठ मेला 31 अगस्त को

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 सरायख्वाजा का ऐतिहासिक भादो छठ मेला 31 अगस्त को


कई राज्यों से पहुंची दुकानें, सूरज कुण्ड का कराया गया साफ—सफाई

भीड़ बढ़ने पर सिद्धीकपुर व कोइरीडीहा से होगा रूट डायवर्जन
सरायख्वाजा, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के ऐतिहासिक भादो छठ का मुख्य मेला 31 अगस्त दिन रविवार को लगेगा जबकि मेला शुरू हो गया है। इसकी तैयारी पूरी होने का जिम्मेदारों ने दावा किया है। सुबह 4 बजे से ही लोग सूरज कुंड में स्नान करेंगे। मान्यता है कि सूरज कुंड में स्नान करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। भीड़ बढ़ने पर सिद्दीकपुर और कोइरीडीहा से रूट डायवर्जन किया जाएगा। मुख्य मेला 31 अगस्त रविवार को लगेगा जिसके लिए सूरजकुंड तलाब की साफ-सफाई कराई गई है और नहाने के लिए बैरिकेटिंग की गई है। आस्था के प्रतीक सूरज कुंड में स्नान करने के लिए दूसरे जनपदों और कई राज्य से लोग आते हैं। सड़क के दोनों पटरी को जेसीबी मशीन से 3 किलोमीटर तक साफ सफाई ग्राम प्रधान रैना सिंह, प्रतिनिधि संतोष सिंह द्वारा कराया गया है। बता दें कि भादो छठ के ऐतिहासिक मेला कृषि यंत्रों के लिए भी जाना जाता है जो किसान मेला भी कहा जाता है हालांकि पहले यह मेला एक सप्ताह पूर्व शूरू हो जाता था लेकिन आबादी बसने के चलते मेला अब रविवार को ही सिमट कर रह गया है। जबकि कृषि यंत्रों की खरीदारी के लिए तीन दिन तक चलता रहता है। इस बाबत पूछे जाने पर थाना प्रभारी जय प्रकाश यादव का कहना है कि अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था की गई है जो मेलें में व्यवस्था की निगरानी रखेंगे। अगर भीड़ बढ़ी तो सिद्दीकपुर से करजाकला, मल्हनी मार्ग होते हुए कोइरीडीहा के लिए रोड डायवर्जन कर दिया जाएगा। बैरियर लगाया जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मेले का अस्तित्व खत्म ना हो इसके लिए तमाम तरह की व्यवस्था की जा रही है। मेले में दुकानदारों से किसी भी प्रकार से वसूली पर रोक लगा दी गई है। मेला जासोपुर, पूर्वांचल विश्वविद्यालय भकुरा मोड, सरायख्वाजा, कोइरीडीहा, मल्हनी, लपरी, इटौरी बाजार सहित कुल 10 किलोमीटर दूरी में लगेगा। बाहर से सैकड़ों दुकानदारों ने मेला में पहुंचकर अस्थाई दुकान लगाने के लिये जगह का चुनाव कर लिया है।

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