मुकदमे एवं डरा—धमकाकर मनोबल गिरा देंगे, इस भ्रम में न पड़े प्रशासन: रत्नेश
जनपद भर से कार्यकर्ता मंगलवार को पहुंचकर एसडीएम को सौंपेंगे पत्रकग्रामीणों ने बैठकर करके कानूनी कार्यवाही पर आगे की बनायी रणनीति
केराकत, जौनपुर। स्थानीय क्षेत्र के बकुलिया गांव में बाबा साहब के प्रतिमा के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद आक्रोशित भीड़ द्वारा चक्काजाम लगाने के मामले में पुलिस द्वारा सैकड़ो लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया। जिसके बाद ग्रामीणों ने कानूनी कार्यवाही और आगे की रणनीति पर आसपा के जिला प्रभारी रत्नेश कुमार के साथ बैठक करके गहन मंथन किया। इस दौरान मुकदमे के मुख्य बिन्दु और वर्तमान स्थिति समेत अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करते हुये मंगलवार को एसडीएम को पत्रक सौंपने पर अपनी सहमति जतायी।
पत्र—प्रतिनिधि से बात करते हुये रत्नेश कुमार ने कहा कि जब बाबा साहब की मूर्ति खंडित होती है तो हमारी भावनाएं आहत होती हैं। जनपद की यह पहली प्रतिमा होगी जिसे एक बार नहीं, बल्कि करीब 6 बार खंडित की गयी है जिससे लोगों में भारी आक्रोश था। मौके पर पहुंचे आलाधिकारी को आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी समेत 4 सूत्रीय मांग रखी गयी थी। नयी प्रतिमा व सीसीटीवी कैमरा तो लगवा दिया गया लेकिन मामले के करीब 6 दिन बाद पुलिस द्वारा एक झूठा रूप देकर मुकदमा दर्ज कर बताया गया कि मौके पर दुकान बंद थी। अफरा—तफरी का माहौल था और एम्बुलेंस को रोकी गयी तो मैं बताना चाहता हूं कि हम लोगों के पास वीडियो फुटेज है। मानवता को ध्यान में रखते हुये भीड़ एम्बुलेंस के पीछे है। इसका मतलब है कि भीड़ खुद एम्बुलेंस को आगे बढ़ रही है। दुकान बन्द नहीं थी। घटना से लेकर अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई और न ही कोई सीसीटीवी फुटेज दिखाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार के रवैया से प्रेरित होकर पुलिस द्वारा 22 अप्रैल को सैकड़ों लोगों पर मुकदमा करना यह दर्शाता है कि सरकार की केवल मंशा है कि बाबा साहब की मूर्तियों का ध्यान रखना केवल मीडिया में प्रदर्शित करना है जबकि जमीनी हकीकत ऐसा कुछ भी नहीं है। आरोपी के गिरफ्तारी करने के बजाय पुलिस जिनकी भावनाएं आहत हुई हैं, उन सैकड़ों लोगों पर मुकदमा करना आसान समझा, इसलिये जनपद भर से लोग 28 अप्रैल दिन मंगलवार को नार्मल मैदान में उपस्थित होकर शांतिप्रिय तरीके से एसडीएम कार्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार को पत्रक सौंपकर फर्जी मुकदमे को वापस लेने समेत आदि मांगो को उठायी जायेगी। यदि मांग नहीं मानी गयी तो जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी को पत्रक सौंपा जायेगा। इसके बाद भी मांग नहीं मानी गयी तो हम लोग प्रशासन के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा लड़ेंगे और हम चाहेंगे कि पुलिस चार्जशीट डाले और वे अपना साक्ष्य लाये और हम लोग अपना साक्ष्य लेकर पहुंचेंगे। निसंकोच यह लड़ाई लड़ी जायेगी। प्रशासन के दिमाग में अगर ऐसा है कि मुकदमा करके या डरा—धमकाकर हमारा मनोबल गिरा सकते है, तो ऐसा नहीं है। इस भ्रम में लोग न रहें। हाईकोर्ट भी जाना पड़े तो हम लोग जरूर जायेंगे।

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