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गेंदा फूल की खेती से बदली किसान राम सहाय की तकदीर

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 गेंदा फूल की खेती से बदली किसान राम सहाय की तकदीर


कम जमीन में आधुनिक खेती अपनाकर बने क्षेत्र के प्रगतिशील किसान



सुईथाकला जौनपुर


 विकास खंड सुईथाकला के ग्राम गैरवाह निवासी राम सहाय आज क्षेत्र में एक सफल और प्रगतिशील किसान के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। इंटरमीडिएट शिक्षित राम सहाय के पास मात्र एक हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे पारंपरिक तरीके से गेहूं और धान की खेती करते थे, लेकिन सीमित भूमि, बढ़ती खेती लागत और कम उत्पादन के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही थी। खेती केवल जीवन-यापन का साधन बनकर रह गई थी और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी।

राम सहाय बताते हैं कि शुरुआत में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और आधुनिक खेती की जानकारी के अभाव में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पारंपरिक बीज और उर्वरकों के उपयोग से लागत बढ़ती जा रही थी, जबकि आमदनी सीमित थी। ऐसे समय में वर्ष 2025-26 में उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने एससीपी (राज्य सेक्टर) योजना के तहत 0.2 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।

उद्यान विभाग द्वारा उन्हें फूलों की खेती की आधुनिक तकनीक, पौध प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था और बाजार की मांग के अनुरूप खेती करने का प्रशिक्षण दिया गया। विभागीय सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने उन्नत तकनीकों का प्रयोग किया, जिससे उनकी फसल बेहतर हुई। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और शादी-विवाह के मौसम में गेंदा फूल की भारी मांग के कारण उन्हें अच्छा बाजार मूल्य मिला।

मात्र 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती से उन्हें लगभग दो लाख रुपये की आय प्राप्त हुई, जबकि कुल लागत करीब 60 हजार रुपये रही। इस तरह उन्हें लगभग 1.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।

राम सहाय की सफलता अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। उनका कहना है कि सही जानकारी, सरकारी योजनाओं का लाभ और मेहनत के बल पर कम जमीन में भी किसान अच्छी आमदनी अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।

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