सत्य का तीनों काल में अभाव नहीं होता: नारद महाराज
मड़ियाहूं, जौनपुर। सत्य वस्तु का तीनों कालों में अभाव नहीं होता है। असत्य वस्तु का कोई अस्तित्व नहीं होता है। सत्य की प्राप्त का स्रोत तत्वदर्शी महापुरुष होते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी शरण में जायं। उक्त बातें परमहंस स्वामी श्री अड़गड़ानन्द महाराज जी के शिष्य नारद महाराज ने भंवरास आश्रम में शिवानन्द बाबा की पुण्यतिथि पर आमजन को सम्बोधित करते हुए कही। उन्होंने आगे कहा कि अपनी जिम्मेदारियो का मर्यादा के साथ निर्वहन करते हुये चाहे वह समाजसेवा हो, शिक्षा हो, राजनीति हो या पारिवारिक दायित्व हो, उस परम परमपिता परमेश्वर के नाम का भजन जरूर करें। कलियुग केवल नाम अधारा।
उन्होंने कहा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मेरी पूजा बहुत ही सरल है। पुष्प, पत्र, जल, फल, जो भी मुझे श्रद्धा, भाव, समर्पण एवं विश्वास के साथ अर्पित करता है और जहां कहीं भी अर्पित करता है, उसे मैं प्रकट होकर वहीं पर ग्रहण करता हूं। प्रभु ही समस्त जनों की मनोकामना को पूर्ण करते हैं। भगवान जानते हैं कि मेरे भक्त को क्या चाहिए।
उन्होंने बताया कि गीता में स्पष्ट है कि किसी तत्वदर्शी महापुरुष की शरण में रहकर भजन करो और तुम्हारे सारे शंकाओं का निराकरण करेंगे। उनकी कृपा से लोभ, मोह, माया सब दूर होंगे और भगवान के चरणों में मन लगने लगेगा। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने भी लिखा है— हरि व्यापक सर्वत्र समाना प्रेम ते प्रगट होहि मैं जाना। ईश्वर कण-कण में व्याप्त है। प्रेम, श्रद्धा और समर्पण से प्रकट हो जाते हैं। इस घर कालि काल में ओम, राम, शिव जो भी अच्छा लगे, सबका अर्थ एक ही है। नियमित उसे प्रभु का नाम का कीर्तन करें, सुमिरन करें और नियमित उसे परमात्मा को समय दें। तमाम शंकाओं के निवारण हेतु यथार्थ गीता पढ़ें। आप सबका कल्याण होगा।
इस अवसर पर आश्रम के सन्त सेवा बाबा, दर्शनानन्द बाबा, वियोगी बाबा, विवेकानन्द पाण्डेय, शिवकुमार यादव, माधवेन्द्र सिंह, आचार्य विनय दुबे, प्यारे लाल शर्मा, रविन्द्र यादव एडवोकेट, मनोज, राकेश, राकेश सेठ, डब्बू शर्मा सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

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