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सोशल मीडिया, साथियों के दबाव और भ्रामक प्रचार से युवा बढ़ रहे हैं वेपिंग की ओर, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

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 सोशल मीडिया, साथियों के दबाव और भ्रामक प्रचार से युवा बढ़ रहे हैं वेपिंग की ओर, विशेषज्ञों ने जताई चिंता


नई दिल्ली, 28 मई 2026।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 से पहले आयोजित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और जनस्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बच्चों और किशोरों में बढ़ती वेपिंग तथा निकोटिन उत्पादों की लत पर गंभीर चिंता व्यक्त की। विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया, साथियों का दबाव (पीयर प्रेशर) और भ्रामक विज्ञापन युवाओं को वेपिंग की ओर आकर्षित कर रहे हैं।
मदर्स अगेंस्ट वेपिंग (MAV) द्वारा आयोजित "अनमास्किंग द अपील: प्रोटेक्टिंग चिल्ड्रेन फ्रॉम न्यू-एज गेटवे प्रोडक्ट्स" विषयक सम्मेलन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में वेप, ई-सिगरेट, हीटेड टोबैको प्रोडक्ट्स और अन्य उभरते निकोटिन उपकरणों से युवाओं को होने वाले खतरों पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के माध्यम से वेपिंग उत्पादों को फैशनेबल, सुरक्षित और सामाजिक रूप से स्वीकार्य बताकर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे युवाओं में इनके प्रति आकर्षण बढ़ रहा है और कम उम्र में निकोटिन की लत लगने का खतरा पैदा हो रहा है।
फेलिक्स हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. डी.के. गुप्ता ने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाने में परिवारों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बदलते सामाजिक रुझानों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और बच्चों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखना चाहिए ताकि वे सही निर्णय ले सकें।
फेलिक्स हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. रश्मि गुप्ता ने कहा कि बच्चे अपने आसपास के वयस्कों के व्यवहार से सीखते हैं। यदि परिवार या समाज में हानिकारक आदतों को सामान्य माना जाएगा तो बच्चे भी उन्हें स्वीकार्य समझने लगेंगे।
मनोवैज्ञानिक एवं हैप्पीनेस स्टूडियो की संस्थापक डॉ. भावना बरमी ने कहा कि बच्चों को नशे की लत से बचाना केवल माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है। स्कूलों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, मित्र समूहों और पूरे समाज को मिलकर सुरक्षित वातावरण तैयार करना होगा।
वहीं, सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कनिका मलिक ने कहा कि भारत ने वेपिंग और इससे जुड़े उत्पादों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रामक प्रचार और नीतिगत कमजोरियों के जरिए इन उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों पर सतर्क निगरानी रखना आवश्यक है।
सम्मेलन के अंत में सभी विशेषज्ञों ने परिवारों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों, वैज्ञानिकों, सामुदायिक नेताओं और नीति निर्माताओं के बीच मजबूत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता, शिक्षा, सामुदायिक सहभागिता और प्रभावी नियमन के माध्यम से ही बच्चों और युवाओं को निकोटिन की लत तथा वेपिंग जैसे उभरते खतरों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

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