श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव में उमड़ा श्रद्धा और भक्ति का सैलाब
धर्म को जानना ही नहीं, बल्कि जीवन में उतारना महत्वपूर्ण है: आचार्य शांतनु जी महाराज
जौनपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में बी.आर.पी. इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का अत्यंत मार्मिक एवं भावपूर्ण वर्णन किया। उनके ओजस्वी प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
आचार्य शांतनु जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि वास्तविक सौंदर्य केवल बाहरी रूप में नहीं, बल्कि धर्म को जीवन में जीने की पद्धति में निहित है। धर्म को जानना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है धर्म को मानना और उसके आदर्शों को अपने आचरण में उतारना। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, विनम्रता, कर्तव्यनिष्ठा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
राम-लक्ष्मण के जनकपुर पहुंचने का किया भावपूर्ण वर्णन
महाराज जी ने बताया कि जब महर्षि विश्वामित्र भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जनकपुर पहुंचे, तो इसकी सूचना मिलते ही राजा जनक उनसे मिलने के लिए पहुंचे। दोनों राजकुमारों की मनमोहक छवि देखकर राजा जनक आश्चर्यचकित रह गए। उन्होंने महर्षि विश्वामित्र से जिज्ञासापूर्वक पूछा कि ये दोनों तेजस्वी और सुंदर बालक कौन हैं?
महर्षि विश्वामित्र ने परिचय देते हुए बताया कि ये दोनों अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र श्रीराम और लक्ष्मण हैं। इसके बाद दोनों भाइयों ने गुरु विश्वामित्र से जनकपुर नगर भ्रमण की इच्छा व्यक्त की। गुरु की आज्ञा प्राप्त कर दोनों भाई नगर देखने के लिए निकल पड़े।
महाराज जी ने इस प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि श्रीराम और लक्ष्मण की दिव्य छवि देखकर नगरवासी मंत्रमुग्ध हो गए। हर कोई उन्हें अपलक निहारता रह गया। नगर की गलियों में दोनों भाइयों के सौंदर्य, शालीनता और तेज की चर्चा होने लगी।
पुष्प वाटिका में श्रीराम और माता सीता का अलौकिक मिलन
कथा को आगे बढ़ाते हुए आचार्य शांतनु जी महाराज ने पुष्प वाटिका के प्रसंग का मनोहारी चित्रण किया। उन्होंने बताया कि गुरु पूजन के लिए पुष्प लेने पहुंचे भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने वाटिका के माली के प्रति सम्मान प्रकट किया और पुष्प लेकर लौटने लगे। इसी दौरान माता सीता अपनी सखियों के साथ गौरी पूजन के लिए वाटिका में पहुंचीं।
सखियों ने जब श्रीराम और लक्ष्मण को देखा, तो वे उत्सुकतावश दौड़कर माता सीता के पास पहुंचीं और दोनों राजकुमारों के अनुपम सौंदर्य का वर्णन करने लगीं। जब भगवान श्रीराम की दृष्टि माता सीता पर पड़ी, तो वह अलौकिक छवि को निहारते रह गए। यह प्रसंग प्रेम, पवित्रता और आत्मिक आकर्षण का अद्भुत उदाहरण है।
महाराज जी ने इस दृश्य को अपनी भावपूर्ण वाणी में प्रस्तुत करते हुए कथा स्थल पर भक्ति और भावुकता का वातावरण बना दिया। श्रद्धालु श्रीराम-जानकी के इस दिव्य प्रसंग को एकाग्रता से सुनते रहे।
स्वयंवर में नहीं हिला सके राजा शिवधनुष, श्रीराम ने तोड़ा धनुष
श्रीराम कथा के सबसे रोमांचक प्रसंग में आचार्य शांतनु जी महाराज ने माता सीता के स्वयंवर का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था, जिसमें देश-विदेश के अनेक राजा और राजकुमार शामिल हुए। सभी के मन में शिवधनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने और माता सीता से विवाह करने की अभिलाषा थी।
एक-एक करके अनेक शक्तिशाली राजा शिवधनुष को उठाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं सका। स्वयंवर में उपस्थित राजाओं के प्रयास विफल होने पर राजा जनक चिंतित हो उठे। तभी महर्षि विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम को धनुष उठाने की आज्ञा दी।
गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान श्रीराम आगे बढ़े। उन्होंने श्रद्धा और सहजता के साथ शिवधनुष को उठाया। जैसे ही उन्होंने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, वह भंग हो गया। धनुष टूटने की गूंज के साथ ही स्वयंवर स्थल जयघोष से गूंज उठा और माता सीता ने भगवान श्रीराम के गले में वरमाला डालकर उन्हें अपने पति के रूप में स्वीकार किया।
आचार्य शांतनु जी महाराज ने इस प्रसंग को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करते हुए बताया कि भगवान श्रीराम का व्यक्तित्व हमें सिखाता है कि सच्ची महानता अहंकार में नहीं, बल्कि विनम्रता, मर्यादा और गुरु की आज्ञा के पालन में होती है।
ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित कथा में रामभक्ति का माहौल
श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव के दौरान पूरा कथा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को धर्म, प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक मर्यादाओं का संदेश मिला।
वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिल रही है। दूर दराज से इस प्रसंग को सुनने के लिए गण मान्य लो उपस्थिति रहे बृज भूषण शरण सिंह, बृजेश सिंह प्रिंसू आर एन सिंह, डॉ आर एन त्रिपाठी, श्री मति सीमा द्विवेदी, डॉ, अरुण कुमार मिश्रा, विनति सिंह एम एल सी चंदौली, भुवनेश्वर सिंह, अमित सिंह सुमित सिंह दीपक सिंह सुनील सिंह, शिवा सिंह,आदि लोग उपस्थित रहे
